27 दिसंबर 2020 - 18:40
इस्राईली टीकाकार ने माना, ग़ज़्ज़ा से पीछे हटना बहुत बड़ी ग़लती थी, इस्राईल को हुआ नुक़सान, हमास को मिला फ़ायदा

इस्राईल के एक टीकाकार ने इस्राईली सैनिकों के ग़ज़्ज़ा से हटने को बहुत बड़ी ग़लती क़रार देते हुए कहा कि सरकार को जिसकी उम्मीद थी उसके विपरीत परिणाम सामने आए।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार इस्राईली टीकाकार मूशे रोवीनी का कहना था कि 15 साल पहले ग़ज़्ज़ा से इस्राईली सैनिकों का निकलना, बहुत बड़ी ग़लती थी और उनके दावे के अनुसार हमास ने इस स्थिति का भरपूर फ़ायदा उठाया।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़ज़्ज़ा से निकलने की वजह से जो स्थिति पैदा हुई वह हमास के हित में हुई और उन्होंने अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ाया। इस्राईली टीकाकार कहता है कि 15 साल पहले लिए गये फ़ैसले के बारे में अब पता चल रहा है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री एरियल शारून ने जो सोचा था कि इससे इस्राईल की सुरक्षा की स्थिति बेहतर होगी, बहुत बड़ी ग़लती थी।

इस्राईल के इस टीकाकार का कहना है कि शारून ने सोचा कि इस्राईल राजनैतिक, आर्थिक, जनसंख्या और सुरक्षा की दृष्टि से लाभ उठाएगा लेकिन जो कुछ हुआ वह उसके विपरीत था, 2008, 2012 और 2014 में तीन जंगें हुईं, गोल्ड स्टोन की रिपोर्ट की वजह से तेल अवीव पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ा, गोल्ड स्टोन की रिपोर्ट ने इस्राईल पर आरोप लगाया कि उसने फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध युद्ध अपराध किए हैं और इन्टरनेश्नल जस्टिस कोर्ट ने भी इस्राईल पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया।

इस्राईली टीकाकार कहता है कि इस्राईल यह समझता था कि वह ग़ज़्ज़ा की वायु सीमा पर पूरी तरह नज़र रखता है और राकेट हमलों को तुच्छ समझा लेकिन 2001 से जब हमास की क़स्साम ब्रिगेड ने सेदीरूत बस्ती पर पहला राकेट मारा तो यह ख़तरा बड़ा से बड़ा होता गया।

इस्राईली टीकाकार ने हमास की मीज़ाइल शक्ति का लोहा मानते हुए कहा कि हमास के आंदोलन 120 किलोमीटर तक पहुंच गये और हालिया वर्षों में लगभग 500 मीज़ाइल और राकेट इस्राईल की ओर फ़ायर किए। वर्ष 2005 में ग़ज़्ज़ा से इस्राईली सैनिकों के निकलने के विषय को कुछ इस्राईली कमान्डर रणनैतिक पराजय मानते हैं।